वास्तु और ग्रह (Vastu and Planets)
ग्रहों का सम्बन्ध ज्योतिशास्त्र से माना जाता हैं. क्योंकि ज्योतिषशास्त्र
में ही ग्रहों की शुभ एवं अशुभ दशाओं का अध्ययन किया जाता हैं तथा यह बताया
जाता हैं कि किस राशी पर ग्रहों के कैसे प्रभाव पड रहे हैं. लेकिन ग्रहों
का सम्बन्ध केवल ज्योतिषशास्त्र से ही नहीं इसका सम्बन्ध वास्तु से
भी हैं. जिस प्रकार मनुष्य के जीवन पर ग्रहों की दशाओं का शुभ व अशुभ प्रभाव
पड़ता हैं ठीक उसी भांति निर्जीव वस्तुओं पर भी ग्रहों का समान प्रभाव पड़ता हैं.
इसे हम एक उदहारण से भी समझ सकते हैं. CLICK HERE TO READ MORE ABOUT भवन में जल व्यवस्था वास्तु के अनुसार ...
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Vastu ke Sath Grahon ka Sambandh |
उदहारण (Example) – एक स्थान पर दो पत्थर एक साथ पड़े हुए
हैं उन दोनों में एक पत्थर का इस्तेमाल आप भगवान की मूर्ति को बनाने के लिए
करते है और दुसरे को वहीँ पड़े रहने देते हैं अर्थात उसका प्रयोग आप मंदिर
की सीढियों को बनाने के लिए भी नहीं करते. दोनों ही पत्थर भवन की तरह एक निर्जीव
वस्तु हैं. लेकिन इन पर पड़ रहे ग्रहों के प्रभाव का ही यह नतीजा हैं कि एक
जैसी ही दो निर्जीव वस्तुओं को दो जगह प्राप्त होती हैं एक को उठाकर मंदिर में
रख लिया जाता हैं तथा दूसरा वहीँ जमीन पडा रह जाता हैं.
वास्तुशास्त्र एवं ज्योतिषशास्त्र दोनों ही शास्त्रों में दिशाओं की संख्या 8
मानी गई हैं तथा यह सिद्ध किया गया हैं कि प्रत्येक दिशा पर एक स्वामी और एक
ग्रह का प्रभाव पड़ता हैं. आज हम इसी विषय पर आप से चर्चा करेंगे कि किस दिशा
पर ग्रहों का प्रभाव कैसा पड़ता हैं अर्थात उस दिशा पर ग्रह का शुभ प्रभाव पड़ता
हैं या अशुभ. सभी ग्रहों एवं दिशाओं की विवेचना नीचे की गई हैं –
1.सूर्य (Sun) – हर दिन सुबह सूर्य पूर्व
दिशा से ही उदय होता हैं इसलिए इस दिशा पर भी इस ग्रह का मुख्य प्रभाव पड़ता
हैं. जिस भवन का मुख पूर्व दिशा की ओर होगा, उस घर में रह रहे व्यक्ति
श्रेष्ठ व्यक्तित्व के धनि होते हैं, अधिक ओजस्वी तथा समृद्ध होते
हैं. ऐसे घर में रहने वाले लोगों का आर्थिक
विकास तेजी से होता हैं तथा इनका लग्न सिंह होता हैं इस घर के लोग मेथी, करेला
जैसी कडवी सब्जियां अत्यधिक पसंद होती हैं.
2.चन्द्र (Moon) – चन्द्र ग्रह का प्रभाव भवन
की वायव्य दिशा में होता हैं. वायव्य दिशा का सम्बन्ध वायु तत्व से
होता हैं इसलिए यह माना जाता हैं कि जिस घर का मुख इस दिशा की ओर होगा उस घर में
रह रहे लोगों का मन भी वायु की तरह कभी स्थिर नहीं रहेगा. ऐसे घर के
सदस्यों का मन हमेशा चंचल, अथिर तथा भावनाओं में जल्द बहने वाला होता हैं,
इन्हें घूमना – फिरना, मौज - मस्ती करना अच्छा लगता हैं. ये भोजन में अधिक हरी
सब्जियों को खाना और नमकीन पदार्थों का सेवन करना अधिक पसंद करते हैं.
3.मंगल (Mars) – जिस घर का मुख दक्षिण
दिशा की ओर होता हैं उस घर पर मंगल ग्रह का प्रभाव अधिक पड़ता हैं. ऐसे घर में
निवास करने वाले लोग कर्म करने वाले, साहसी, निडर तथा स्वभाव से
थोड़े चंचल होते हैं. इन लोगों को अधिक मसालेदार भोजन खाना अधिक
स्वादिष्ट लगता हैं. CLICK HERE TO READ MORE ABOUT सही दिशा में हो द्वार तो खुशियाँ आयें घर में बेशुमार ...
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वास्तु के साथ ग्रहों का सम्बन्ध |
4. बुध (Mercury) – जिस दिशा का मुख्य द्वार
उत्तर दिशा की ओर हो उस घर पर बुध ग्रह का स्वामित्व रहता हैं. बुध ग्रह
को बुद्धि और विनोद प्रदान करने वाला ग्रह माना जाता हैं. इसीलिए जो व्यक्ति
इस घर में रहते हैं वो श्रेष्ठ बुद्धि के होते हैं और उन्हें अपनी
बुद्धि के कारण ही अधिक प्रसिद्धि प्राप्त होती हैं. इस घर के अधिकतर सदस्यों
का लगाव साहित्य और लेखन से होता हैं.इस घर में रह रहे लोगों को अनुसासन
में रहना अधिक अच्छा लगता हैं तथा ये किसी विशेष भोजन पर ध्यान न देकर जैसा
भी भोजन मिल जाता हैं उसे ग्रहण कर लेते हैं.
5.बृहस्पति (Jupiter) – जिस भवन का मुख्य द्वार
ईशान कोण की ओर होता हैं. उस भवन पर बृहस्पति ग्रह का आधिपत्य होता
हैं. इस भवन का स्वामी काफी दयालु, विचारशील और धार्मिक प्रवृति का
होता हैं. इन लोगों की धर्म – कर्म के कार्यों में अधिक रूचि होती हैं तथा
इस घर के सदस्य हर तरह की परिस्थिति का सामना करने के लिए तत्पर रहते हैं
और जरुरत पड़े तो शत्रुओं से लड़ने के लिए भी तैयार हो जाते हैं. इस घर के
लोगों की रूचि अधिक अध्ययन करने में लोगों को शिक्षा प्रदान करने में शिक्षा
तथा भाषा का ज्ञान अर्जन करने में अधिक होती हैं तथा ये सात्विक और शुद्ध
भोजन करने में अधिक विश्वास करते हैं.
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Grah Anusar Ghar ke Logon ki Mukhy Pravriti ko Jaane |
6. शुक्र (Venus) – शुक्र ग्रह का आधिपत्य उस
घर पर होता जिसका मुख आग्नेय कोण की ओर हो. शुक्र ग्रह को विलासिता, मौज
– मस्ती का प्रतीक माना जाता हैं. इसीलिए ऐसे घर में रहने वाले लोगों की मुख्य
प्रवृति यही होती हैं. इन पर शुक्र ग्रह का प्रभाव इतना अधिक रहता हैं कि इस घर
के सदस्य अपनी आय का अधिकतर हिस्सा मनोरंजन से सम्बन्धित वस्तुओ और कार्यक्रमों को
देखने में खर्च कर देते हैं तथा ये अपने जीवन में कितने भी व्यस्त क्यों न
हो मनोरजन के लिए समय जरूर निकाल लेते हैं. निष्कर्ष के रूप में हम इस घर के
लोगों को कला प्रेमी कह सकते हैं. क्योंकि ये कला प्रेमी होते हैं. इसीलिए
इन्हें अधिक चटकीले और भड़कीले रंग और वस्तु ही अधिक भाते हैं और ये अधिक
स्वादिष्ट भोजन जैसे – पनीर, दही तथ खट्टे पदार्थों का सेवन करना अधिक अच्छा लगता
हैं.
7.शनि (Saturn)– शनि ग्रह का प्रभाव पश्चिम
दिशा वाले भवन पर अधिक रहता हैं. शनि ग्रह का स्वभाव अधिक कठोर और गंभीर
माना जाता हैं. इसलिए इस घर के मुखिया के स्वभाव में अधिक गम्भीरता होती हैं
तथा वो हर कार्य को सोच – समझ कर उसके फायदे और नुकसान के बारे में जानने के
बाद ही करते हैं. इन लोगों को गरिष्ट भोजन, अधिक तेल वाला भोजन तथा ठंडा जल
पीना अधिक पसंद होता हैं.
8.राहु (Raahu) – राहु ग्रह का आधिपत्य नैऋत्य
कोण वाले भवन पर होता हैं. इस घर के स्वामी अत्यधिक क्रोधी होते हैं. इन्हें
मांस मछली वाला भोजन खाना अच्छा लगता हैं.
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Grah Aur Disha |
9.केतु (Ketu) - केतु को तामसी प्रवृति का द्योतक माना जाता हैं.
इसीलिए इस घर के स्वामी में भी तामसिकता, घमंड अधिक होता हैं. बात – बात पर
गुस्सा करना इनकी खास प्रवृति होती हैं. इन्हें मांसाहारी व बासी
भोजन खाना अच्छा लगता हैं.
ग्रहों के अनुसार घर में निवास करने वाले व्यक्तियों के
स्वभाव के बारे में अधिक जानने के लिए आप नीचे तुरंत कमेंट करके जानकारी हासिल कर
सकते हैं.
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Vastu ke Anusar Grahon ke Shubh Aur Ashubh Prabhav |
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Anusar Grahon ke Shubh Aur Ashubh Prabhav
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Scuty lena chahte h to kon se din pe 26, 27 tk
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