स्वादिष्ट इमली के गुण
इमली का स्वाद खाने में खट्टा होता हैं. इसका खट्टा स्वाद
कुछ लोगों को बहुत पसंद आता है और कुछ को नहीं भी लेकिन दवाई में इसका उपयोग सभी
करते है . औषधि बनाने के लिए इमली का प्रयोग करना बहुत ही लाभदायक होता हैं. औषधि बनाने
के लिए इमली के पेड़ की पत्ती, फूल, फल, इमली के बीज, पेड़ की छाल, लकड़ी, जड़ और बीज
का आवरण आदि सभी हिस्सों का प्रयोग किसी न किसी रूप में होता हैं. इमली की तथा
इसके पेड़ की अपनी कुछ अलग ही खासियत हैं. जैसे इमली के पेड़ की विशेषता यह हैं इस
पर किसी भी मौसम का फर्क नहीं पड़ता यह सदैव हरा - भरा रहता हैं. बल्कि पतझड़ के
मौसम में भी यह हर – भरा ही रहता हैं. जबकी पतझड़ के मौसम में सारे पेड़ के पत्ते झड़
जाते हैं और पेड़ सूखने लग जाते हैं. इमली के पेड़ की एक और विशेषता यह हैं की इस पर
वर्षों तक फल लगते हैं. इमली के पेड़ भारत के उष्ण भागों में स्वयं ही उत्पन्न हो
जाते हैं तथा यह फल भारत देश के सभी भागों में पाया जाता हैं. दक्षिण भारत में
इमली का सेवन अधिक मात्रा में किया जाता हैं. इमली के पेड़ की पैदावार क्षारीय व
लवणीय भूमि पर अधिक होती हैं. इमली की विशेषता यह हैं की इसे प्रत्येक उम्र के लोग
खाना पसंद करते हैं. इमली को देखते ही बच्चे – बड़े सभी के मुंह में पानी आ जाता
हैं.
इमली के पेड़ तीन प्रकार के होते हैं. एक
पेड़ खट्टे फलों वाला होता हैं. दूसरा मीठे फलों वाला होता हैं तथा तीसरा लाल फलों
वाला होता हैं. इन तीनो में से लाल फलों वाला पेड़ ज्यादा महत्वपूर्ण हैं इसका अधिक
महत्व इसलिए हैं क्यूंकि इस पेड़ के फलों के पकने के बाद इकट्ठा करके अधिक समय के
लिए रखा जा सकता हैं. इमली के पेड़ की लम्बाई लगभग 30 मीटर के आस – पास होती हैं.
इमली के पेड़ घने, शिश्वर युक्त तथा ऊंचे होते हैं. इमली के पेड़ की पत्तियाँ छोटी –
छोटी होती हैं इनकी लम्बाई करीब 1 सें.मी. तक होती हैं. इमली के पेड़ की पत्तियां
इमली के पेड़ की डंडी के दोनों और लगी होती हैं. तथा इनकी संख्या 15 से 20 से.मी.
लम्बी डंडी पर 15 से 20 तक की हो सकती हैं. इमली के पेड़ के फूलों का रंग पीला होता
हैं. पेड़ पर इमली के फूल बहुत छोटे होते हैं जिन पर हल्की – हल्की लाल धारियां
होती हैं. इमली के पेड़ पर इमली के फल फली के रूप में लगते हैं. इमली के पक्की हुई
फलियों के अंदर भूरे रंग का गूदा होता हैं जो की रेशेदार होता हैं. इमली के पेड़ पर
लगने वाली एक – एक फली के अंदर कत्थई रंग के आवरण में चिपटे बीजों की संख्या 3 से
10 तक हो सकती हैं. CLICK HERE TO READ MORE SIMILAR POSTS ...
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स्वादिस्ट इमली के गुण |
खाने को खट्टा और स्वादिष्ट बनाने के लिए जिस प्रकार आमचूर, निम्बू या अचार का प्रयोग करते हैं. उसी प्रकार भोजन
को अधिक स्वादिष्ट बनाने के लिए भी कुछ लोग इमली का भी प्रयोग करते हैं. बल्कि हम
यह कह सकते हैं की भोजन को स्वादिष्ट बनाने में अन्य खट्टे खाद्य पदार्थों से
ज्यादा इमली का उपयोग किया जाता हैं. क्यूंकि इसमें और खट्टे पदार्थों से अधिक
अम्लता पाई जाती हैं. पकी हुई इमली तथा इमली कच्ची दोनों ही प्रकार की इमली बहुत
ही स्वादिष्ट होती हैं कच्ची इमली में अम्लता के साथ – साथ मिठास भी होती हैं तथा
यह खाने में बहुत ही नर्म लगती हैं.
इमली के पेड़ की पैदावार भारत के साथ – साथ अन्य देशों में भी होती हैं.
अमेरिका, अफ्रीका तथा एशिया जैसे देशों में भी इसकी पैदावार होती हैं. अलग – अलग
देशों में इमली के लिए अलग – अलग नाम प्रचलित हैं. इसे हिंदी भाषा में इमली के नाम
से ही जाना जाता हैं. तो संस्कृत भाषा में अम्लिका के नाम से जाना जाता हैं. बंगाल
में यह तेंतुल नाम से प्रसिद्ध हैं. तो तेलगु में यह चिन्चाचेट्ट के नाम से
प्रसिद्ध हैं. तमिल भाषा में इमली को पुली कहते हैं तो मलयालम में इसे कोलपुली
कहते हैं. कन्नड़ में इमली के लिए हुणिसे नाम प्रचलित हैं. मराठी भाषा में चिंच नाम
से इसे सभी जानते हैं. फारसी भासा में इसे खुर्माए कहते हैं. अंग्रेजी भाषा में
इमली को अंग्रेजी शब्द टेमेरिण्ड से जाना जाता हैं. इमली का लैटिन नाम टेमेरिण्डस
इण्डिकस हैं. CLICK HERE TO READ MORE SIMILAR POSTS ...
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Qualities of Tamarind |
इमली के बीजों में भी कुछ तत्व पाए जाते हैं. इमली के बीजों में नमी 10.5
प्रतिशत होती हैं तथा प्रोटीन की मात्रा 13.9 प्रतिशत होती हैं. इमली के बीजों में
तेल की मात्रा 4.5 प्रतिशत होती हैं. बीजों में नाइट्रोजन रहित सार 63.2 प्रतिशत
होता हैं. इसमें रेशे की मात्रा 5.4 प्रतिशत होती हैं. बीजों में राख की मात्रा
3.10 प्रतिशत होती हैं.
मनुष्य के शरीर के पाचन तन्त्र को नियंत्रित करने के लिए इमली बहुत ही लाभदायक
होती हैं. इमली का सेवन करने से हमारे शरीर का पाचन तन्त्र ठीक ढंग से कार्य करता
हैं. क्यूंकि इमली की तासीर ठंडी होती है जिससे भोजन आसानी से पच जाता हैं तथा भूख
बढ़ जाती हैं. इमली का सेवन कभी भी दूध के साथ नहीं करना चाहिए. तथा कुछ बीमारी में
इसका सेवन करने से बचना चाहिये. खासतौर से जब आपको बुखार, कफ या वात की शिकायत हो.
मासिक धर्म के दिनों में भी इमली का सेवन नहीं करना चाहिए.
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Swadist Imali ke Gun |
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